जल प्रदूषण


वास्तव में जल शब्द मोती के समान है। जल एक ऐसी प्राकृतिक अमूल्यवान वस्तु है। जिसके बिना लगभग हर जीव का जी पाना मुश्किल है।  परंतु मनुष्य जल के साथ बहुत बुरा व्यवहार कर रहा है। वह दिन प्रतिदिन जल प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। जल प्रदूषण केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में व्याप्त है। यदि जल प्रदूषण की समय पर रोकथाम नहीं की गई तो  भविष्य  में जल दुर्लभता का सामना करना पड़ेगा। जल प्रदूषण के कारण बहुत सी बीमारियों को बढ़ावा मिला है। 

 जैसे कि: पीलिया, मलेरिया, गुर्दे में पथरी, जुखाम, दस्त, चेचक, मोती जीरा, आदि । 
                                                                                                            
बिना जल के मनुष्य का जीवन है अधूरा
जल है तो मनुष्य का जीवन है पूरा


जल प्रदूषण के मुख्य कारण: जल प्रदूषण   मुख्यत रूप से निम्नलिखित कारणों से होता है।

1. तालाबों में जानवरों को नहलाना:    तालाबों में जानवरों को नहलाना जल प्रदूषण का मुख्य कारण है। क्योंकि जानवरों के मल मूत्र से तालाब का सारा पानी गंदा हो जाता है। जिसके कारण योग्य जल अयोग्य हो जाता है। तालाबों में जानवरों को नहलाना किसी मूर्खता से कम नहीं। यह अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलता है।

2. चिमनियों तथा फैक्ट्रियों के कारण:  आधुनिक युग में लगभग हर क्षेत्र में चिमिनिया तथा फैक्ट्रियां पाई जाती हैं। जोकि जल प्रदूषण को बहुत तेजी से बढ़ावा दे रही हैं । क्योंकि इनसे निकलने वाले हर जहरीले पदार्थ तथा जहरीले धुएं को नदियों तथा जल में मिला दिया जाता है। जिसके कारण भारी संख्या में जल प्रदूषित हो जाता है। और इस प्रदूषित जल के कारण कई बीमारियां उत्पन्न हो जाती है।


जैसे कि :  चिमनियों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाली जहरीली पदार्थों तथा  गैसों को नदियों में मिला दिया जाता है जिसके कारण नदियों का संपूर्ण जल प्रदूषित हो जाता है। इस प्रदूषित जल से नदियों के हर जीव के लिए एक बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है क्योंकि इस प्रदूषित जल से नदियों के जल में कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं जिससे कि नदियों के हर जीव को जीवन निर्वाह करना में बहुत कठिन हो जाता है । और भारी संख्या में जीव मरने लगते हैं। जिससे वातावरण को बहुत हराश पहुंचता है।



3. जल पंप चलाकर वाहनों तथा कपड़ों को धोना: आधुनिक युग में लगभग हर क्षेत्र के लोग वाहनों तथा कपड़ों को जल पंप चला कर धोने लगे हैं। जिससे कि वह बहुत अधिक जल को व्यर्थ बहा देते हैं। बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पशुओं तथा मवेशियों को भी जल पंप चला कर नहलाने लगे हैं। जिससे जल प्रदूषण को बहुत तेजी से बढ़ावा मिल रहा है। इसे शायद सबसे बड़ी मूर्खता कहा जाता होगा कि लोग वाहनों, कपड़ों तथा पशुओं को पंप चला कर नहलाते हैं। यदि इस पर रोकथाम नहीं की गई तो भविष्य में आने वाली नस्लों को जल दुर्लभता का सामना करना पड़ सकता है।

4. साडी गली चीजों तथा मरे हुए पशुओं को तालाबों तथा जलाशयों में फेंकना।  लगभग हर क्षेत्र के लोगों में एक गंदी आदत पाई जाती है। वह गंदी आदत यह है कि उन्हें सड़ी गली चीजों तथा मरे हुए पशुओं को नहरों तथा जलाशयों में फेंकना बहुत अच्छा लगता है। तालाबों तथा जलाशयों में सडी गली चीजों को फेंकने से   उनके योग्य जल में कीटाणु शामिल हो जाते हैं जिनके कारण वह अयोग्य  जल बन जाता है। और उसमें बहुत सी बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं ।


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